बारिश का पहला प्यार – भाग 5: फिर से वही बारिश 🌧️💞
तीन महीने बीत गए। जय अब भी रोज़ उसी बस स्टॉप पर आता, जहां कभी पहली बार अवनी को देखा था। वो अब नहीं आती, लेकिन जय की उम्मीद हर दिन आती थी। अवनी बैंगलोर में अपने काम में व्यस्त थी, पर हर शाम एक छोटी-सी व्हाट्सएप नोटिफिकेशन, एक स्माइली, या बारिश की तस्वीर उनके प्यार को ज़िंदा रखती थी। फिर एक दिन… दिल्ली में मौसम अचानक बदल गया। काले बादल, ठंडी हवा, और... वही पहली बारिश। जय जैसे ही बस स्टॉप पर पहुँचा, वो बारिश में भीगने लगा। उसने मुस्कुरा कर आँखें बंद कीं, और खुद से कहा, "बारिश आ गई… तू भी आ जा, अवनी..." और जब उसने आँखें खोली… वो सामने खड़ी थी। भीगी हुई, मुस्कुराती हुई, और हाथ में एक छाता लेकर। जय की आँखें भर आईं, वो कुछ बोल नहीं पाया। अवनी ने धीरे से कहा, "वो जॉब सिर्फ सपना था… और तुम मेरी ज़िन्दगी। अब वापस आ गई हूँ, हमेशा के लिए।" जय ने उसे कसकर गले लगा लिया। बारिश की बूंदें अब उनके बीच नहीं थीं, वो दोनों खुद अब एक-दूसरे की बारिश बन चुके थे।