बारिश का पहला प्यार – भाग 4: फासले और वादे ✈️💔
जय और अवनी अब हर किसी की नज़रों में एक-दूसरे के लिए बने थे। उनकी हंसी, बातों और साथ बिताए हर पल में एक मासूम सी मोहब्बत थी। पर ज़िन्दगी हर बार आसान कहां होती है?
एक दिन कैफे में बैठकर अवनी थोड़ी चुप थी।
जय ने पूछा, "सब ठीक है?"
अवनी ने धीमे से कहा,
"मुझे एक जॉब ऑफर मिला है… बैंगलोर में।"
जय की मुस्कान एक पल में रुक गई।
"कब जाना है?"
"दो हफ्तों में…" अवनी ने नजरें चुरा लीं।
वो दोनों चुप थे। बारिश बाहर गिर रही थी, और अंदर दिल। जय ने बस इतना कहा,
"तुम्हारे जाने से सब रुकेगा… लेकिन अगर तुम्हारा सपना है, तो मैं तुम्हारे साथ हूँ। दूर रहकर भी।"
अवनी की आँखों में आंसू थे, लेकिन मुस्कान भी।
"वादा करो, बारिश जब भी होगी… तुम मुझे याद करोगे?"
जय ने उसका हाथ थामा और कहा,
"नहीं… हर मौसम में करूँगा। बारिश तो बस बहाना है।"
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