बारिश का पहला प्यार – भाग 3: पहली डेट और पहला इकरार ☕🌧️❤️
जय और अवनी की मुलाक़ातों को अब कुछ हफ़्ते हो चुके थे। उनके बीच कोई "official" रिश्ता नहीं था, लेकिन दिल तो कब का एक हो चुका था। हर सुबह बस स्टॉप पर एक-दूजे की राह देखना अब आदत बन चुकी थी।
एक दिन अवनी ने मुस्कराते हुए कहा,
"आज कहीं और चलते हैं... बारिश तो नहीं है, लेकिन दिल भीगना चाहिए!"
जय थोड़ा चौंका, फिर खुशी से मान गया।
वे पास की एक छोटी-सी बुक कैफे में चले गए—वहीं, जहां दीवारों पर कविताएं थीं और खिड़की के बाहर हलकी बूंदाबांदी शुरू हो गई थी... जैसे मौसम भी उन दोनों की कहानी पढ़ रहा हो।
अवनी ने एक किताब उठाई और पढ़ना शुरू किया,
"कुछ एहसास ऐसे होते हैं, जो कहे बिना भी समझ में आ जाते हैं..."
जय ने उसकी आँखों में देखा और कहा:
"अवनी… मैं तुम्हें हर दिन देखता हूँ, पर हर दिन कुछ नया महसूस करता हूँ। मैं नहीं जानता ये क्या है, लेकिन अगर ये प्यार है… तो मुझे ये बहुत पसंद है।"
अवनी थोड़ी देर चुप रही, फिर मुस्कराई और बोली:
"तुम्हारी बातें भी बारिश जैसी हैं—धीरे-धीरे आती हैं… और पूरा भीगो देती हैं।"
फिर उसने अपना हाथ जय के हाथ पर रखा।
पहला इकरार... बिना किसी शोर के, बस दिल की धड़कनों में।
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